इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry) cover art

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

इसे तुम कविता नहीं कह सकते (#poetry)

By: Lokesh Gulyani
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Summary

Spoken word poetry in Hindi by Lokesh GulyaniCopyright Lokesh Gulyani Philosophy Social Sciences
Episodes
  • Episode 60 - PSPSPSPS
    May 3 2026
    रोज़ सुबह नहाते हुए मैं अपने बढे हुए पेट की ढलान से नीचे देखने की कोशिश करता हूँ। वहीं देखकर एक मर्द पता लगा सकता है कि उसका पेट कितना बढ़ गया है। पेट बढ़ा है या नहीं, ये पेट तय नहीं करता है।
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    3 mins
  • Episode 59 - विटामिन डी से दोस्ती
    May 3 2026
    ये बात मुझे सोचने पर मजबूर करती है कि D3 और B12 की कमी से तो देश की लगभग 80% जनता जूझ रही है तो फिर तो हम पीड़ित लोगों का स्वभाव और दिल का हाल तो मिलना चाहिए था ना!
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    4 mins
  • Episode 58 - ज़हनी पचड़ा
    Apr 13 2026
    सच कह रहा हूं मैं, अब पाप करने के बारे में भी सोचने लगा हूं, आख़िर कहीं से तो किक और एड्रीनलीन रश मिले। मुझे बचाने की मत सोचो, अपनी फ़िक्र करो।
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    4 mins
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